हरदा। मध्यप्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के तीसरे दिन सदन में हरदा विधायक डॉ. रामकिशोर दोगने ने जनहित से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण विषयों को प्रभावी ढंग से उठाते हुए सरकार का ध्यान हरदा जिले की प्रमुख समस्याओं की ओर आकर्षित किया। विधायक द्वारा लगाए गए प्रश्नों एवं ध्यान आकर्षण सूचनाओं के माध्यम से आउटसोर्स कर्मचारियों की समस्याएं, विकास कार्यों की प्रगति तथा औद्योगिक विकास जैसे मुद्दे प्रमुखता से सदन में सरकार के समक्ष रखे गए।
आउटसोर्स कर्मचारियों के वेतन भुगतान का मुद्दा।
सबसे पहले हरदा विधायक डॉ. दोगने द्वारा ध्यान आकर्षण सूचना के माध्यम से शिक्षा विभाग के अंतर्गत कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों की गंभीर समस्याओं को सदन के सामने रखा। उन्होंने बताया कि शासकीय विद्यालयों एवं कार्यालयों में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारी वर्षों से निरंतर सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन एजेंसियों द्वारा उनका वेतन समय पर भुगतान नहीं किया जा रहा है तथा कई कर्मचारियों का 03 माह से अधिक का वेतन लंबित है।
उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि ईपीएफ, ईएसआईसी जैसी वैधानिक सुविधाओं में अनियमितता, अवकाश एवं चिकित्सा सुविधाओं का अभाव तथा नियमितीकरण की कोई ठोस नीति न होने से कर्मचारी आर्थिक व मानसिक रूप से परेशान हैं। विधायक ने सरकार से मांग की कि लंबित 03 माह का वेतन तत्काल भुगतान कराया जाए तथा कर्मचारियों की समस्याओं के स्थायी निराकरण हेतु ठोस कार्यवाही की जाए।
सुल्तानपुर में औद्योगिक क्षेत्र स्थापना में देरी पर चिंता
इसी क्रम में दूसरी ध्यान आकर्षण सूचना के माध्यम से विधायक डॉ. दोगने ने हरदा जिले के सुल्तानपुर में औद्योगिक क्षेत्र की स्थापना में हो रही देरी का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि शासन स्तर पर घोषणा एवं भूमि चिन्हांकन के बावजूद अब तक औद्योगिक क्षेत्र की स्थापना की दिशा में कोई ठोस कार्यवाही नहीं हुई है।
उन्होंने सदन में बताया कि औद्योगिक क्षेत्र स्थापित न होने से क्षेत्र के युवाओं को रोजगार के अवसर नहीं मिल पा रहे हैं, जिससे बेरोजगारी एवं पलायन की स्थिति बन रही है। विधायक ने सरकार से शीघ्र आवश्यक कार्यवाही कर औद्योगिक क्षेत्र स्थापित करने की मांग की, ताकि स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत हो और युवाओं को रोजगार उपलब्ध हो सके।
हंडिया बैराज निर्माण संबंधी प्रश्न ?
हरदा विधायक डॉ. दोगने द्वारा प्रश्न क्रमांक 796 के माध्यम मुख्यमंत्री से प्रश्न किया गया कि हंडिया बैराज का निर्माण कार्य कब स्वीकृत किया गया, निर्माण प्रारंभ एवं पूर्ण होने की तिथि क्या है, कुल स्वीकृत लागत कितनी है तथा वर्तमान में कितनी राशि व्यय की जा चुकी है साथ ही यह भी पूछा गया कि बैराज का निर्माण किस योजना/परियोजना अंतर्गत किया जा रहा है, उसकी तकनीकी विशेषताएं (लंबाई, ऊँचाई, भंडारण क्षमता, गेटों की संख्या) क्या हैं, इससे सिंचित होने वाला क्षेत्रफल कितना होगा, किन-किन ग्रामों/क्षेत्रों को लाभ मिलेगा, निर्माण एजेंसी/ठेकेदार कौन है, अनुबंध राशि कितनी है तथा क्या निर्माण के दौरान या पश्चात गुणवत्ता एवं तकनीकी जांच कराई गई है या नहीं।
इस पर मुख्यमंत्री द्वारा उत्तर देते हुए बताया गया कि हंडिया बैराज का निर्माण कार्य दिनांक 06/08/2021 को स्वीकृत किया गया तथा 09/01/2023 को कार्य प्रारंभ हुआ है। अनुबंध अनुसार कार्य पूर्णता की तिथि 08/01/2029 निर्धारित है। परियोजना की कुल स्वीकृत लागत राशि 1294.27 करोड़ रुपये है, जिसमें से वर्तमान में 886.21 करोड़ रुपये व्यय किए जा चुके हैं। बैराज की कुल लंबाई 561 मीटर, ऊँचाई 10.50 मीटर, भंडारण क्षमता 190.89 एमसीएम एवं गेटों की संख्या 31 है। निर्माण कार्य प्रगतिरत है तथा गुणवत्ता की जांच विभागीय मानकों एवं डिजाइन ड्राइंग के अनुसार कराई जा रही है। निर्माण कार्य हेतु मेमर्स करण डेवलपमेंट प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड (जीव्ही) ग्वालियर को राशी रुपए 1160.84 करोड़ में अनुबंधित किया गया है तथा विस्तृत जानकारी परिशिष्ट के अनुसार उपलब्ध कराई गई है।
आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ भोपाल में दर्ज शिकायत की जांच संबंधी प्रश्न ?
प्रश्न क्रमांक 455 के माध्यम से विधायक डॉ. दोगने ने पूछा कि हरदा मंडी भूमि घोटाले के मामले में शिकायतकर्ता श्री प्रदीप अहिरवार द्वारा आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ इकाई भोपाल में दर्ज शिकायत, जो प्रकरण क्रमांक 152/2025 में दर्ज की गई है, उसकी जांच की वर्तमान स्थिति क्या है, क्या जांच पूर्ण हो चुकी है, यदि हाँ तो जांच में क्या पाया गया एवं जांच रिपोर्ट उपलब्ध कराई जाए, तथा यदि जांच पूर्ण नहीं हुई है तो इसके कारण क्या हैं और जांच कब तक पूर्ण होगी।
जिस पर मुख्यमंत्री द्वारा उत्तर में बताया गया कि हरदा कृषि उपज मंडी भूमि के संबंध में की गई शिकायत आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ में दर्ज होकर सत्यापनाधीन है। शिकायत की जांच अभी पूर्ण नहीं हुई है। जांच में प्राप्त तथ्यों एवं साक्ष्यों के आधार पर अग्रिम विधिसम्मत कार्यवाही का प्रावधान है तथा जांच की समय-सीमा बताना संभव नहीं है।
आरक्षक संवर्ग के पुलिसकर्मियों की वेतन वृद्धि रोकने संबंधी प्रश्न ?
प्रश्न क्रमांक 458 के माध्यम से विधायक द्वारा पूछा गया कि वर्ष 2006 से प्रश्न दिनांक तक मध्यप्रदेश में कितने आरक्षक संवर्ग के पुलिसकर्मियों की स्थायी रूप से वेतन वृद्धि रोकी गई, उनमें से कितनों ने डीआईजी/आईजी/एडीजी/डीजीपी स्तर पर अपील प्रस्तुत की, क्या पुलिस रेग्युलेशन एक्ट के पैरा 226 में स्थायी रूप से वेतन वृद्धि रोकने की स्पष्ट मनाही है, क्या इस संबंध में समय-समय पर पुलिस महानिदेशक द्वारा निर्देश जारी किए गए तथा वर्ष 2016 के बाद इस विषय में विधानसभा में प्रश्न लगाए गए या नहीं।
इस पर मुख्यमंत्री द्वारा उत्तर देते हुए कहा गया कि संबंधित जानकारी एकत्रित की जा रही है। पुलिस रेग्युलेशन के पैरा 226 में प्रावधान अनुसार दंड का उल्लेख किया गया है तथा पुलिस महानिदेशक द्वारा नियमों के अनुरूप निर्देश जारी किए जाते हैं। पृथक से कोई विशेष निर्देश जारी नहीं किए गए हैं। साथ ही यह भी बताया गया कि पुलिसकर्मी दंडादेश के विरुद्ध सक्षम अधिकारी के समक्ष अपील कर सकता है, जिसका निराकरण प्रकरण के गुण-दोष के आधार पर किया जाता है।
मुख्यमंत्री के जवाब पर विधायक डॉ. दोगने का बयान।
हरदा विधायक डॉ. रामकिशोर दोगने ने कहा कि सरकार द्वारा सदन में दिए गए जवाबों से यह स्पष्ट है कि कई महत्वपूर्ण मुद्दे अभी भी लंबित एवं प्रक्रियाधीन हैं। उन्होंने कहा कि हंडिया बैराज, कर्मचारियों के वेतन, औद्योगिक क्षेत्र की स्थापना तथा शिकायतों की जांच जैसे विषय सीधे जनता के हित से जुड़े हैं। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि हरदा जिले के विकास, आउटसोर्स कर्मचारियों के अधिकार एवं युवाओं के रोजगार के मुद्दों पर वे लगातार सदन और शासन स्तर पर आवाज उठाते रहेंगे तथा समस्याओं के समाधान तक संघर्ष जारी रहेगा।
