हरदा खिरकिया । क्षेत्र का बहुचर्चित चारूवा मेला इस वर्ष अपनी पहचान और रौनक खोता नजर आ रहा है। मेला शुरू हुए 22 दिन बीत चुके हैं, लेकिन मेले का मैदान अब भी सूना पड़ा है। जहां हर साल इस समय तक हजारों लोगों की भीड़ उमड़ती थी, वहीं इस बार सन्नाटा पसरा हुआ है। खाली पड़े झूले, आधी बंद दुकानें और निराश बैठे व्यापारी मेले की बदहाली की कहानी खुद बयां कर रहे हैं। स्थानीय व्यापारियों और ग्रामीणों का कहना है कि इस बार मेले के आयोजन में भारी लापरवाही बरती गई है। पर्याप्त प्रचार-प्रसार नहीं होने से दूर-दराज के लोग मेले की जानकारी तक नहीं पा सके। नतीजा यह हुआ कि मेले में आने वाली भीड़ बेहद कम रह गई और व्यापार ठप हो गया। कई दुकानदारों ने नाम न बताते हुए कहा कि वे हर साल बड़ी उम्मीद के साथ यहां दुकान लगाते हैं, लेकिन इस बार ग्राहकों की कमी से उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। कुछ व्यापारियों ने तो समय से पहले ही दुकान समेटने की तैयारी शुरू कर दी है। ग्रामीणों का आरोप है कि गुप्तेश्वर मेला समिति ने मेले की व्यवस्थाओं पर गंभीरता नहीं दिखाई। साफ-सफाई, प्रकाश व्यवस्था और मनोरंजन के साधनों की भी कमी नजर आ रही है। जिस मेले को क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान माना जाता था, वह अब अव्यवस्था और उदासीनता की भेंट चढ़ता दिख रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते मेला समिति ने ठोस तैयारी की होती, प्रचार-प्रसार बढ़ाया होता और बेहतर व्यवस्थाएं की होतीं तो आज मेले की तस्वीर कुछ और होती। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि मेले की स्थिति का संज्ञान लेकर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या आने वाले दिनों में चारूवा मेले की रौनक वापस लौटेगी या फिर इस साल यह मेला अव्यवस्था और उदासीनता की भेंट चढ़कर इतिहास बनकर रह जाएगा।
चारूवा मेला 22 दिन बाद भी सूना — रौनक गायब, गुप्तेश्वर मेला समिति की व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
