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30 साल बेदाग सेवा, फिर भी ट्रांसफर, अशोक राजपूत के अटैचमेंट पर उठे गंभीर सवाल, मंडी बोर्ड की कार्यशैली कटघरे में: बिना जांच खिरकिया से टिमरनी अटैचमेंट क्यों? आखिर किसके इशारे पर हुआ अटैचमेंट? खिरकिया मंडी का मामला बना चर्चा का विषय

हरदा। कृषि उपज मंडी में पदस्थ प्रभारी मंडी निरीक्षक अशोक राजपूत का अचानक टिमरनी मंडी में अटैचमेंट किए जाने का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि न तो किसी प्रकार की जांच सामने आई है और न ही किसी आधिकारिक पत्र की स्पष्ट जानकारी, इसके बावजूद मंडी बोर्ड द्वारा यह कार्रवाई कर दी गई। सूत्रों के मुताबिक, खिरकिया की कृषि उपज मंडी से हटाकर जिले की एकमात्र अन्य प्रमुख मंडी टिमरनी में अटैचमेंट किया गया है। इस फैसले ने न सिर्फ मंडी प्रशासन बल्कि स्थानीय स्तर पर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
बिना जांच कैसे हुआ फैसला?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर बिना किसी जांच-पड़ताल के इतनी जल्दबाजी में यह निर्णय क्यों लिया गया। आमतौर पर किसी भी अधिकारी या कर्मचारी के अटैचमेंट या स्थानांतरण से पहले कारण स्पष्ट किए जाते हैं, लेकिन इस मामले में पारदर्शिता की कमी साफ नजर आ रही है।
क्या यह निर्णय किसी उच्च स्तर के दबाव में लिया गया?
या फिर मंडी बोर्ड के जिम्मेदार अधिकारियों ने किसी विशेष निर्देश पर तत्काल एक्शन लिया?
ये सवाल अब चर्चा का विषय बन चुके हैं।
निरीक्षक अशोक राजपूत ने क्या कहा
इस पूरे मामले पर निरीक्षक अशोक राजपूत ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, मेरे ऊपर किसी प्रकार की कोई जांच नहीं चल रही है। 30 साल की नौकरी में मैं कभी भी किसी मंडी में विवादित नहीं रहा। इसके बावजूद मुझे खिरकिया से टिमरनी अटैच कर दिया गया, जो समझ से परे है।” उनका कहना है कि इस कार्रवाई के पीछे क्या कारण है, इसकी कोई स्पष्ट जानकारी उन्हें भी नहीं दी गई है। उन्होंने कहा कि दो बार मुझे खिरकिया कृषि उपज मंडी से, सिर्फ हरदा जिले की टिमरनी कृषि उपज मंडी ही अटैचमेंट क्यों किया जाता है। झूठी शिकायत के बावजूद भी मेरे ऊपर किसी प्रकार की कोई जांच नहीं हुई इसके बाद भी मुझे विवादित बनाया जा हे जबकि विभाग मे किसी प्रकार की कोई जांच नहीं चल रही है मुझे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है अगर किसी प्रकार की घटना घटित होती है तो इसका जिम्मेदार मंडी बोर्ड और खिरकिया के कुछ लोग रहेगे जिनका नाम भी सार्वजानिक करूगा। क्युकि मुझ पर जो आरोप लगाये जा रहे हैं वह निराधार है 30 साल की नौकरी में आज दिनांक तक में विवादित नहीं रहा हूं इसके बावजूद भी मुझ पर झूठे आरोप लगाकर मानसिक रूप से परेशान किया जा रहा है।
मंडी बोर्ड की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
इस घटना के बाद मंडी बोर्ड की कार्यशैली पर भी सवाल उठने लगे हैं। बिना कारण बताए या जांच किए इस तरह का अटैचमेंट प्रशासनिक पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करता है। स्थानीय व्यापारियों और मंडी से जुड़े लोगों का भी मानना है कि यदि कोई आरोप या शिकायत थी, तो पहले उसकी जांच होनी चाहिए थी। सीधे अटैचमेंट का फैसला कई संदेह पैदा करता है।
क्या है असली वजह?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर इस फैसले के पीछे असली वजह क्या है— क्या यह प्रशासनिक आवश्यकता थी? या फिर किसी दबाव में लिया गया निर्णय? क्या आने वाले समय में इस पर जांच होगी?
इन तमाम सवालों के जवाब फिलहाल अधूरे हैं, लेकिन मामला धीरे-धीरे तूल पकड़ता जा रहा है।
जांच की मांग तेज
इस पूरे घटनाक्रम के बाद अब प्रभारी निष्पक्ष जांच की मांग भी उठने लगी है। यदि वास्तव में कोई कारण है, तो उसे सार्वजनिक किया जाना चाहिए, और यदि नहीं—तो जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली की जांच जरूरी मानी जा रही है।
खिरकिया से टिमरनी मंडी में निरीक्षक का अटैचमेंट अब एक सामान्य प्रशासनिक फैसला न रहकर “जांच का विषय” बन चुका है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि मंडी बोर्ड इस मामले में कोई सफाई देता है या फिर जांच के आदेश जारी होते हैं या फिर पुनः नियुक्त किया जाता है।

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