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खिरकिया में गौ रक्षकों की रैली, एसडीएम को सौंपा ज्ञापन गौ संरक्षण और पंचगव्य आधारित नीतियों की उठाई मांग

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खिरकिया। नगर में गौ रक्षा और गो आधारित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने की मांग को लेकर रविवार को गौ रक्षकों ने एक विशाल रैली का आयोजन किया। रैली कृषि उपज मंडी गेट से प्रारंभ होकर मुख्य मार्गों से गुजरते हुए तहसील कार्यालय पहुंची, जहां प्रदर्शनकारियों ने एसडीएम को ज्ञापन सौंपकर अपनी प्रमुख मांगें रखीं। रैली में बड़ी संख्या में गौ सेवक, सामाजिक कार्यकर्ता और स्थानीय नागरिक शामिल हुए। रैली के दौरान “गौ माता को राष्ट्र माता का दर्जा दो” और “गो हत्या बंद करो” जैसे नारों से वातावरण गूंज उठा। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि गौ संरक्षण केवल आस्था का विषय नहीं, बल्कि कृषि, पर्यावरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से भी गहराई से जुड़ा हुआ है। छीदगांवमेल मैं हुई दर्दनाक घटना को लेकर प्रदर्शनकारियों ने कहा कि आरोपियों को जल्दी से जल्दी गिरफ्तार कर कड़े से कड़ी सजा दी जाए।
ज्ञापन में रखी गई प्रमुख मांगें
गौ रक्षकों ने ज्ञापन के माध्यम से शासन-प्रशासन के सामने कई महत्वपूर्ण मांगें रखीं, जिनमें प्रमुख रूप से—
गौ माता को “राष्ट्र माता” का दर्जा देकर सम्मान प्रदान किया जाए।
गो रक्षा के लिए सख्त केंद्रीय कानून बनाया जाए।
पूरे देश में गौ हत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए।
गौ आधारित उत्पादों और अनुसंधान को बढ़ावा देने की मांग
ज्ञापन में गोगव्य (गोबर, गोमूत्र आदि) के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा गया कि गोबर और गोमूत्र पर व्यापक अनुसंधान के लिए विश्वविद्यालय स्थापित किए जाएं। दूध, दही, घी सहित पंचगव्य उत्पादों को बढ़ावा देने हेतु ठोस नीतियां बनाई जाएं। गोबर-गोमूत्र आधारित प्रसंस्करण इकाइयों को प्रोत्साहन और नवीन अनुसंधान को बढ़ावा मिले। रासायनिक कृषि पर नियंत्रण कर गो आधारित प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया जाए।
इसके साथ ही सरकारी भवनों और अस्पतालों में गोबर पेंट तथा फिनायल के स्थान पर “गौनाइल” के उपयोग को अनिवार्य करने, आयुर्वेदिक अस्पतालों में पंचगव्य औषधियों के निःशुल्क वितरण और बड़े शॉपिंग मॉल में गो आधारित उत्पादों के लिए विशेष काउंटर स्थापित करने की मांग भी की गई।
उद्यम और धार्मिक स्थलों से जुड़ी मांगें
गौ रक्षकों ने मांग रखी कि, गोबर और गोमूत्र आधारित उद्योग लगाने वाले उद्यमियों को प्रोत्साहन दिया जाए।
सरकारी नियंत्रण वाले मंदिरों में पूजा, भोग और प्रसाद में देशी गाय के दूध, दही और घी का उपयोग अनिवार्य किया जाए। बैल आधारित कृषि करने वाले किसानों को विशेष आर्थिक सहायता प्रदान की जाए। गौशालाओं, चारा और गोचर भूमि को लेकर उठे मुद्दे
ज्ञापन में निराश्रित गोवंश की स्थिति सुधारने के लिए भी कई अहम सुझाव दिए गए सभी राज्यों में गौशालाओं को पर्याप्त अनुदान दिया जाए ताकि निराश्रित गोवंश की उचित देखभाल हो सके। चारे की उचित कीमत तय कर अवैध भंडारण पर सख्ती से रोक लगाई जाए।
चारे का उपयोग केवल पशु आहार के रूप में सुनिश्चित किया जाए और फैक्ट्रियों में जलाने पर प्रतिबंध लगे।
देशभर में गोचर भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कर “गोचर विकास बोर्ड” का गठन किया जाए तथा इन भूमि का उपयोग केवल गौशालाओं और गो चराई के लिए किया जाए।
प्रशासन से सकारात्मक कार्रवाई की अपेक्षा
गौ रक्षकों ने कहा कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई तो वे आगे और बड़ा आंदोलन करने को बाध्य होंगे। वहीं एसडीएम ने ज्ञापन प्राप्त कर आश्वासन दिया कि मांगों को शासन स्तर तक पहुंचाया जाएगा और नियमानुसार उचित कार्रवाई की जाएगी। रैली शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुई, लेकिन इससे यह स्पष्ट हो गया कि क्षेत्र में गौ संरक्षण और गो आधारित नीतियों को लेकर जनभावना मजबूत हो रही है। इस दोरान बड़ी संख्या मे नगर के जनप्रतिनिधिगण नागरिकगण शामिल हुए।

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