Fri. May 15th, 2026

हरदा में किसान क्रांति आंदोलन: हजारों ट्रैक्टरों के साथ सड़कों पर उतरे किसान, भाजपा सरकार के खिलाफ बुलंद हुई आवाज उचित मूल्य, कर्ज माफी, सिंचाई और बिजली की मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन; कांग्रेस विधायक डॉ. आर.के. दोगने टिमरनी विधायक अभिजीत शाह सहित जनप्रतिनिधियों ने दिया समर्थन

हरदा। जिले में किसान क्रांति आंदोलन के तहत मंगलवार को किसानों का अभूतपूर्व जनसैलाब देखने को मिला। हजारों की संख्या में किसान ट्रैक्टर लेकर हरदा पहुंचे और भाजपा सरकार के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। किसानों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर हुंकार भरते हुए सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया, जिससे पूरे शहर में आंदोलन का व्यापक असर देखने को मिला।
सुबह से ही आसपास के गांवों से किसान ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ हरदा की ओर रवाना होने लगे थे। शहर में प्रवेश करते ही ट्रैक्टरों की लंबी कतारें दिखाई दीं। किसानों ने नारेबाजी करते हुए अपनी मांगों को लेकर प्रशासन और सरकार का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया।
मुख्य मांगों को लेकर उठी आवाज
किसानों ने इस आंदोलन के माध्यम से अपनी प्रमुख मांगें सामने रखीं। किसानों का कहना है कि उन्हें उनकी फसल का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है, जिससे आर्थिक संकट गहराता जा रहा है। उन्होंने सरकार से फसल के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर गारंटी कानून लागू करने की मांग की।
इसके साथ ही किसानों ने कर्ज माफी और कम ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराने की मांग भी रखी। उनका कहना है कि बढ़ते कर्ज और महंगे ब्याज के कारण किसान आर्थिक रूप से टूट रहा है।
सिंचाई, बिजली और खाद-बीज की समस्या भी प्रमुख मुद्दा
आंदोलन में शामिल किसानों ने सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी की गारंटी की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि पानी की कमी के कारण फसल उत्पादन प्रभावित हो रहा है।
इसके अलावा किसानों ने बिजली की अनियमित आपूर्ति और खाद-बीज की उपलब्धता में आ रही दिक्कतों को भी प्रमुख मुद्दा बताया। किसानों का कहना है कि समय पर खाद और बीज नहीं मिलने से उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ता है।
किसानों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने की मांग
आंदोलन के दौरान किसानों ने यह भी मांग की कि पूर्व में विभिन्न आंदोलनों के दौरान किसानों पर दर्ज किए गए मुकदमों को तत्काल वापस लिया जाए। उनका कहना है कि किसानों को अपनी आवाज उठाने के लिए दंडित करना गलत है।
जनप्रतिनिधियों का मिला समर्थन
किसान क्रांति आंदोलन को स्थानीय जनप्रतिनिधियों का भी समर्थन मिला। हरदा के कांग्रेस विधायक डॉ. आर.के. दोगने और टिमरनी विधायक भी किसानों के बीच पहुंचे और उनके समर्थन में खड़े नजर आए। उन्होंने किसानों की मांगों को जायज बताते हुए सरकार से तत्काल समाधान निकालने की अपील की।
विधायकों ने कहा कि किसान देश की रीढ़ है और उसकी अनदेखी किसी भी हालत में स्वीकार नहीं की जा सकती। उन्होंने आश्वासन दिया कि किसानों की आवाज को विधानसभा तक मजबूती से उठाया जाएगा।
भाजपा सरकार पर साधा निशाना
आंदोलन के दौरान किसानों और विपक्षी नेताओं ने भाजपा सरकार पर जमकर निशाना साधा। उनका आरोप है कि सरकार किसान हितों की अनदेखी कर रही है और उनकी समस्याओं का समाधान करने में विफल रही है।
किसानों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द ही कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
ट्रॉलियों में तंबू लगाए, राशन साथ लेकर आए किसान आंदोलन को लेकर किसान नेता सुनील गोल्या ने बताया कि, “किसान क्रांति आंदोलन मंगलवार सुबह 11 बजे से शुरू हुआ है। किसान अपनी ट्रॉलियों में घर से आटा, दाल और अन्य खाद्य सामग्री लेकर आए हैं। वे मंडी समेत अन्य स्थानों पर दाल-बाटी बनाकर खाएंगे।” वहीं, किसान नेता नानकराम बेनीवाल और राजेंद्र पटेल ने चेतावनी देते हुए कहा, “किसानों ने अपनी ट्रॉलियों को तंबू में बदल लिया है और वे बिस्तर भी साथ लाए हैं। यदि प्रशासन हमारी मांगों के आगे नहीं झुका, तो यह आंदोलन अनिश्चितकालीन भी हो सकता है।” किसानों ने सरकार को अपनी मांगों पर झुकने के लिए मजबूर करने का संकल्प लिया है।
छावनी में तब्दील हुआ इलाका, ट्रैफिक रूट डायवर्ट किसानों के भारी जमावड़े को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह अलर्ट है। सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए हरदा, बैतूल, नर्मदापुरम, रायसेन, जबलपुर, छिंदवाड़ा, सागर और सिवनी सहित पांच बटालियनों के 1100 जवानों को शहर के विभिन्न स्थानों पर तैनात किया गया है। कृषि उपज मंडी और कलेक्ट्रेट क्षेत्र छावनी में बदल चुका है। आम नागरिकों को यातायात में असुविधा न हो, इसके लिए ट्रैफिक पुलिस ने शहर का नया रूट चार्ट भी जारी कर दिया है।
प्रशासन रहा सतर्क
इतने बड़े स्तर पर हुए आंदोलन को देखते हुए प्रशासन भी पूरी तरह सतर्क नजर आया। शहर के प्रमुख मार्गों पर पुलिस बल तैनात किया गया था, ताकि किसी भी प्रकार की अव्यवस्था न हो।

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