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8 लाख की नाली निर्माण में गुणवत्ता पर सवाल, CM हेल्पलाइन तक पहुंची शिकायत;CEO,उपयंत्री और जिम्मेदारों की निगरानी पर उठे सवाल

*8 लाख की नाली निर्माण में गुणवत्ता पर सवाल, CM हेल्पलाइन तक पहुंची शिकायत;CEO,उपयंत्री और जिम्मेदारों की निगरानी पर उठे सवाल*

*शिकायतकर्ता का आरोप—नाली निर्माण में मानकों की अनदेखी, सरिया का पर्याप्त उपयोग नहीं; शिकायत दर्ज होने के बावजूद निराकरण की स्थिति अभी लंबित*

हरदा/खिरकिया। ग्राम पंचायत चारूवा में करीब 8 लाख रुपए की स्वीकृत राशि से कराए जा रहे नाली निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। निर्माण कार्य को लेकर शिकायतकर्ता चंदन चौहान ने सीएम हेल्पलाइन क्रमांक 40734118, दिनांक 24 सितंबर 2026 को शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया है कि नाली निर्माण में निर्धारित गुणवत्ता का पालन नहीं किया जा रहा है और पर्याप्त सरिया भी नहीं लगाया जा रहा।

शिकायत के अनुसार ग्राम चारूवा में पंचायत द्वारा कराया जा रहा नाली निर्माण कार्य करीब 8 लाख रुपए की स्वीकृत राशि से किया जा रहा है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि निर्माण कार्य की गुणवत्ता बेहद खराब है। शिकायत में यह भी कहा गया है कि कार्य में पर्याप्त सरिया नहीं लगाया जा रहा है।

सबसे गंभीर बात यह है कि शिकायतकर्ता ने अधिकारियों और निर्माण से जुड़े जिम्मेदारों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि सचिव और इंजीनियर द्वारा शिकायतकर्ता को यह कहकर मामले को दबाने का प्रयास किया गया कि “काम ऐसा ही होगा”, जबकि बीच में बोलने पर रिपोर्ट डालने की बात कही गई।

*CM हेल्पलाइन में शिकायत, फिर भी कार्रवाई का इंतजार*

शिकायतकर्ता ने मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की मांग की है। CM हेल्पलाइन के रिकॉर्ड में शिकायत की स्थिति *“शिकायत निराकरण अधिकारी (L1) से संपर्क कर शिकायत दे दी गई है, प्रगति विवरण अपेक्षित है”* दर्ज है।

यानी शिकायत दर्ज हुए कई दिन बीतने के बाद भी मामला अभी निराकरण की प्रक्रिया में है। ऐसे में सवाल यह है कि जब लाखों रुपए की लागत से सार्वजनिक धन से निर्माण कार्य हो रहा है, तो उसकी गुणवत्ता की निगरानी की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?

*CEO और उपयंत्री की निगरानी पर उठे सवाल*

पंचायत स्तर के निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और तकनीकी मानकों की निगरानी में संबंधित जनपद पंचायत के CEO तथा तकनीकी अमले/उपयंत्री की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में चारूवा के इस निर्माण कार्य को लेकर शिकायत सामने आने के बाद जिम्मेदार अधिकारियों की निगरानी व्यवस्था भी सवालों के घेरे में है।
यदि शिकायत में लगाए गए आरोप सही हैं तो यह केवल खराब निर्माण का मामला नहीं, बल्कि शासकीय राशि के उपयोग और गुणवत्ता नियंत्रण की व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।

*मौके की जांच से सामने आ सकती है हकीकत*

मामले में सबसे जरूरी है कि संबंधित अधिकारी केवल कागजी रिपोर्ट के आधार पर शिकायत का निराकरण करने के बजाय मौके पर पहुंचकर नाली की लंबाई, चौड़ाई, गहराई, इस्तेमाल की गई सामग्री, सरिया की मात्रा एवं निर्माण की तकनीकी गुणवत्ता की जांच करें।
साथ ही निर्माण की स्वीकृति, तकनीकी स्वीकृति, माप पुस्तिका (MB), भुगतान की स्थिति और कार्य पूर्णता संबंधी रिकॉर्ड की भी जांच की जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि 8 लाख रुपए की राशि के मुकाबले वास्तव में कितना और किस गुणवत्ता का काम हुआ है।
अब देखना यह है कि CM हेल्पलाइन में दर्ज शिकायत के बाद जनपद पंचायत के CEO और संबंधित उपयंत्री मौके पर पहुंचकर निर्माण की वास्तविकता जांचते हैं या फिर कागजी कार्रवाई के जरिए शिकायत का निराकरण कर दिया जाता है।

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