प्रदेश चिकित्सा प्रकोष्ठ में नई जिम्मेदारी, जिले में सियासी सरगर्मी ओर फिर “भाई साहब का भय”…
हरदा। जिले चिकित्सक डॉ. विशाल सिंह बघेल को भारतीय जनता पार्टी के मध्य प्रदेश नेतृत्व द्वारा चिकित्सा प्रकोष्ठ में प्रदेश संयोजक नियुक्त किए जाने के बाद हरदा जिले की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। हरदा जिले के मूल निवासी होने के कारण उनकी नियुक्ति को स्थानीय स्तर पर विशेष महत्व दिया जा रहा है। शहरभर में उनके समर्थन में लगे होर्डिंग्स और बधाई संदेश इस बात का संकेत दे रहे थे कि कार्यकर्ताओं में उत्साह का माहौल है।
हालांकि बधाई देने का तरीका अलग-अलग नजर आया। कुछ भाजपा पदाधिकारी और कार्यकर्ता खुले तौर पर सामने आकर शुभकामनाएं देते दिखाई दिए, वहीं कुछ ने “चोरी-चुपके” बधाई संदेश प्रेषित किए। राजनीतिक गलियारों में इसे भी चर्चा का विषय बनाया जा रहा है। माना जा रहा है कि डॉ. बघेल को यह जिम्मेदारी उनकी चिकित्सा क्षेत्र में सक्रियता और अनुभव को देखते हुए दी गई है। पार्टी नेतृत्व ने उन्हें प्रदेश स्तर पर चिकित्सा क्षेत्र में संगठन को मजबूत करने और नई कार्ययोजना तैयार करने का दायित्व सौंपा है।
इधर जानकारी के मुताबिक , नगर पालिका और विद्युत विभाग द्वारा शहर में लगे पोस्टरों को हटाने की कार्रवाई ने भी चर्चाओं को और हवा दे दी है। आम जनता के बीच यह सवाल उठ रहा है कि क्या यह सामान्य प्रशासनिक कार्रवाई थी या इसके पीछे कोई और संदेश छिपा है। राजनीतिक पर्यवेक्षक इसे स्थानीय स्तर पर बढ़ती प्रतिस्पर्धा से भी जोड़कर देख रहे हैं।
“भाई साहब का भय”
डॉ. विशाल सिंह बघेल की नियुक्ति के बाद शहर में एक और चर्चा जोरों पर है -“भाई साहब का भय”। आम लोगों के बीच यह कहा जा रहा है कि पहले जहां भाजपा के कुछ पदाधिकारी और कार्यकर्ताओं में एक प्रकार का दबाव या संकोच महसूस होता था, अब वही माहौल प्रशासनिक स्तर पर भी दिखाई दे रहा है। फिर दूसरी ओर देखते है कि “भाई साहब” के प्रशंसक यह भी बता रहे हैं कि भाई साहब ने जो काम जिले के लिए किया है,वह किसी और में इस बात की कुबत नहीं। बात विकास की करें, राजनीतिक परिदृश्य की या बड़ी-बड़ी योजनाओं कों धरातल पर उतारने की या फिर दिल्ली तक पहोंच, पकड़ की सब में भाई साहब अव्वल दर्जे के है, यह बात होर्डिंग शहर में नगर पालिका के द्वारा उतारने के बाद जोरों पर चल रही है।
हालांकि इन चर्चाओं की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है, लेकिन शहर के चौराहों, चाय की दुकानों और राजनीतिक बैठकों में यह विषय प्रमुखता से उठ रहा है। कुछ लोग इसे बढ़ती लोकप्रियता का परिणाम मान रहे हैं, तो कुछ इसे राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का हिस्सा बता रहे हैं।
फिलहाल, डॉ. बघेल के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनी नई जिम्मेदारी को प्रभावी ढंग से निभाने की है। यदि वे चिकित्सा प्रकोष्ठ में सक्रिय भूमिका निभाते हुए प्रदेश स्तर पर ठोस पहल करते हैं, तो यह नियुक्ति उनके राजनीतिक और सामाजिक कद को और मजबूत कर सकती है। हरदा की राजनीति में आने वाले समय में इस नियुक्ति के दूरगामी प्रभाव देखने को मिल सकते हैं।
