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चारूवा उपमंडी में धूल खा रहीं कुर्सियां, जब नीलामी ही नहीं तो व्यवस्था किसके लिए? कई दिनों से बंद पड़ी मंडी, उपमंडी में नहीं होता नीलामी कार्य, फिर भी कुर्सियां लगाकर खर्च की गई शासन की राशि

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हरदा खिरकिया । हरदा जिले की खिरकिया कृषि उपज मंडी की उपमंडी चारूवा में इन दिनों एक अजीब स्थिति देखने को मिल रही है। जहां एक ओर उपमंडी में लंबे समय से नीलामी कार्य नहीं हो रहा है जबकि खिरकिया कृषि उपज मे नीलामी कार्य हो रहा है, वहीं दूसरी ओर उप मंडी परिसर में बड़ी संख्या में कुर्सियां लगाकर छोड़ दी गई हैं, जो अब धूल खाती नजर आ रही हैं। इस पूरे मामले को लेकर शासन की राशि के उपयोग पर सवाल खड़े होने लगे हैं। स्थानीय लोगों और किसानों के अनुसार चारूवा उपमंडी में वर्तमान समय में किसी प्रकार का नियमित नीलामी कार्य नहीं हो रहा है। किसान अपनी उपज की बिक्री के लिए यहां नहीं आ रहे हैं और मंडी परिसर लगभग सूना पड़ा रहता है। ऐसे में मंडी परिसर में बड़ी संख्या में कुर्सियां लगाकर छोड़ देने को लेकर लोग हैरानी जता रहे हैं। किसानों का कहना है कि जब मंडी में नीलामी ही नहीं हो रही और किसानों की आवाजाही भी नहीं है, तो फिर इतनी कुर्सियां लगाने की आवश्यकता क्यों पड़ी। लोगों का आरोप है कि सिर्फ कागजों में व्यवस्था दिखाने के लिए शासन की राशि खर्च कर दी गई, लेकिन उसका वास्तविक लाभ किसानों को नहीं मिल रहा है। मंडी परिसर में रखी कुर्सियां लंबे समय से उपयोग के अभाव में धूल फांक रही हैं। कई कुर्सियां इधर-उधर पड़ी हुई हैं, जिससे साफ दिखाई देता है कि उनका किसी प्रकार का उपयोग नहीं किया जा रहा। इस स्थिति को देखकर ग्रामीणों और किसानों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। स्थानीय किसानों का कहना है कि शासन किसानों की सुविधाओं के लिए लगातार योजनाएं और व्यवस्थाएं बना रहा है, लेकिन यदि जमीनी स्तर पर उनका सही उपयोग नहीं किया जाए तो यह सीधे तौर पर सरकारी धन की बर्बादी ही मानी जाएगी। किसानों ने इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों से जांच कर उचित कार्रवाई की मांग भी की है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि उपमंडी में नीलामी कार्य शुरू नहीं होना है, तो वहां इस तरह की व्यवस्थाओं पर खर्च करने के बजाय किसानों की वास्तविक जरूरतों पर ध्यान दिया जाना चाहिए। अब सवाल यह उठ रहा है कि जब चारूवा उपमंडी में नीलामी कार्य बंद है तो आखिर इतनी संख्या में कुर्सियां लगाने का निर्णय किस आधार पर लिया गया। इस पूरे मामले में मंडी प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

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