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शक्कर के भाव में तेजी, बाजार में 70 रुपए किलो तक पहुंची कीमत

शक्कर के भाव में तेजी, बाजार में 70 रुपए किलो तक पहुंची कीमत

हरदा/खिरकिया। त्योहारी सीजन और बाजार में बढ़ती मांग के बीच शक्कर के दामों में तेजी देखने को मिल रही है। खिरकिया सहित आसपास के बाजारों में शक्कर के भाव बढ़कर करीब 70 रुपए प्रति किलो तक पहुंचने से आम उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ गई है। रोजमर्रा की जरूरत वाली शक्कर के महंगे होने का सीधा असर अब गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों की रसोई के बजट पर पड़ रहा है।

रसोई का बिगड़ रहा बजट

शक्कर ऐसी खाद्य सामग्री है जिसका उपयोग लगभग हर घर में चाय, नाश्ते, मिठाई और अन्य घरेलू जरूरतों में होता है। कीमत बढ़ने से सीमित आय वाले परिवारों को अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ रहा है। पहले से ही महंगाई की मार झेल रहे परिवारों के लिए शक्कर के बढ़ते दाम एक और परेशानी बन गए हैं।

दुकानदारों का कहना—थोक भाव बढ़ने से बढ़ी कीमत

स्थानीय किराना व्यापारी रानू जैन, सौरभ नागडा, पिंटू तिवारी निलेश जैन के अनुसार शक्कर के थोक भाव में बढ़ोतरी होने के कारण खुदरा बाजार में भी कीमत बढ़ी है। हालांकि अलग-अलग दुकानों पर भाव में कुछ अंतर देखने को मिल सकता है। व्यापारियों का कहना है कि थोक बाजार में कीमतों में उतार-चढ़ाव के अनुसार खुदरा भाव तय हो रहे हैं।

गरीब परिवारों पर ज्यादा असर

शक्कर के दाम बढ़ने का सबसे अधिक असर गरीब और निम्न आय वर्ग के परिवारों पर पड़ रहा है। जिन परिवारों का मासिक बजट पहले से सीमित है, उनके लिए रोजमर्रा की खाद्य सामग्री के दाम बढ़ना बड़ी चुनौती है। उपभोक्ताओं का कहना है कि सरकार और संबंधित विभाग को बाजार में आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर निगरानी रखना चाहिए, ताकि अनावश्यक महंगाई और जमाखोरी पर रोक लग सके।

उपभोक्ताओं ने जताई चिंता

खिरकिया के उपभोक्ताओं का कहना है कि खाद्य तेल, दाल, सब्जियों सहित कई आवश्यक वस्तुओं के दाम पहले ही आम आदमी की जेब पर असर डाल रहे हैं। अब शक्कर के भाव में तेजी से घरेलू खर्च और बढ़ गया है। लोगों ने मांग की है कि बाजार में शक्कर के वास्तविक थोक और खुदरा भाव की निगरानी की जाए तथा यदि कहीं अधिक कीमत वसूली जा रही है तो संबंधित विभाग द्वारा कार्रवाई की जाए।

बाजार भाव पर प्रशासन की नजर जरूरी

शक्कर जैसी आवश्यक खाद्य सामग्री की कीमतों में अचानक बढ़ोतरी को लेकर प्रशासन और खाद्य विभाग की निगरानी महत्वपूर्ण है। उपभोक्ताओं का कहना है कि दुकानों पर रेट स्पष्ट रूप से प्रदर्शित किए जाएं और निर्धारित नियमों के अनुसार ही बिक्री हो। इससे ग्राहकों को वास्तविक कीमत की जानकारी मिल सकेगी और मनमानी वसूली की शिकायतों पर भी अंकुश लगेगा।

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