Wed. Jul 15th, 2026

तबादला सूची पर उठे सवाल: जिला पंचायत की बड़ी चूक या नियमों की अनदेखी? गृह ग्राम में सचिव की पदस्थापना से मचा बवाल

खिरकिया। जिले में प्रशासनिक फेरबदल और तबादलों का दौर जारी है, लेकिन जिला पंचायत हरदा द्वारा पंचायत सचिवों की जारी तबादला सूची अब सवालों के घेरे में आ गई है। सूची में सामने आए एक मामले ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर कई गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि जिला पंचायत ने एक पंचायत सचिव का तबादला उनके ही गृह ग्राम में कर दिया, जबकि सामान्य प्रशासनिक नियमों के तहत किसी अधिकारी या कर्मचारी को उसके गृह ग्राम में पदस्थ नहीं किए जाने का प्रावधान माना जाता है।
जानकारी के अनुसार पंचायत सचिव रंगलाल धारे, जो वर्तमान में ग्राम कालधड़ में पदस्थ बताए जा रहे हैं, उनका तबादला ग्राम कानपुरा कर दिया गया है। बताया जा रहा है कि ग्राम कानपुरा उनका गृह ग्राम है, जहां उनका स्थायी निवास है और मतदाता सूची में भी उनका नाम दर्ज है। आदेश सामने आने के बाद अब यह मामला जिले में चर्चा का विषय बन गया है।
तबादला सूची को लेकर सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या सूची तैयार करते समय कर्मचारियों की मूल जानकारी का परीक्षण नहीं किया गया, या फिर जानबूझकर नियमों को नजरअंदाज किया गया। क्योंकि किसी भी तबादला प्रक्रिया में कर्मचारी की सेवा संबंधी जानकारी, वर्तमान पदस्थापना, मूल निवास और प्रशासनिक आवश्यकताओं का परीक्षण किया जाता है। ऐसे में यदि किसी कर्मचारी को उसके गृह ग्राम में ही पदस्थ कर दिया गया है तो यह प्रशासनिक स्तर पर गंभीर चूक मानी जा सकती है।
प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि गृह ग्राम में पदस्थापना से निष्पक्षता और कार्यप्रणाली प्रभावित होने की आशंका रहती है। इसी कारण कई विभागों में इस प्रकार के प्रतिबंध और दिशा-निर्देश बनाए जाते हैं। ऐसे में यदि नियमों की अनदेखी हुई है तो यह सवाल केवल एक सचिव के तबादले तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न खड़ा करेगा।
लोगों के बीच यह भी चर्चा है कि यदि एक मामले में ऐसी स्थिति सामने आई है तो क्या अन्य तबादलों में भी इसी प्रकार की त्रुटियां हुई होंगी। अब मांग उठने लगी है कि पूरी तबादला सूची की पुनः समीक्षा की जाए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कहीं अन्य मामलों में भी नियमों का उल्लंघन तो नहीं हुआ।
मामले में अब लोगों की नजर जिला पंचायत प्रशासन पर टिकी हुई है। यदि यह केवल तकनीकी गलती है तो उसमें सुधार किया जाना चाहिए, लेकिन यदि नियमों को दरकिनार कर यह निर्णय लिया गया है तो संबंधित जिम्मेदारों पर भी जवाबदेही तय किए जाने की मांग उठ सकती है।
सवाल जो चर्चा में हैं
• क्या तबादला सूची तैयार करते समय कर्मचारियों के मूल रिकॉर्ड का परीक्षण नहीं किया गया?
• क्या गृह ग्राम में पदस्थापना नियमों के अनुरूप है?
• यदि यह त्रुटि है तो जिम्मेदार कौन?
• क्या पूरी तबादला सूची की दोबारा जांच होगी?
अब देखना यह होगा कि जिला पंचायत इस मामले को तकनीकी गलती बताती है या फिर इस पर कोई स्पष्टीकरण जारी करती है।

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