गहाल समिति की लॉगिन आईडी के कथित दुरुपयोग की चर्चा तेज, किसानों में नाराजगी; पुलिस जांच शुरू, लेकिन निजी ऑनलाइन सेंटर की भूमिका पर अब भी स्पष्टता नहीं
हरदा खिरकिया। जिले में मूंग ई-उपार्जन पंजीयन से जुड़ा विवाद लगातार गहराता जा रहा है। कथित फर्जी पंजीयन, दूसरे किसानों की भूमि पर बिना अनुमति पंजीयन और शासकीय समिति की लॉगिन आईडी के कथित दुरुपयोग को लेकर उठे सवाल अब पूरे जिले में चर्चा का विषय बन गए हैं। सिराली थाना पुलिस द्वारा प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू किए जाने के बावजूद अब किसानों और सामाजिक संगठनों का बड़ा सवाल यह है कि यदि किसी निजी ऑनलाइन सेंटर ने समिति की शासकीय आईडी का उपयोग किया है, तो उसकी जांच आखिर कब होगी?
पुलिस ने अपराध क्रमांक 199/26 के तहत भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318(3) एवं 61 में मामला दर्ज कर विवेचना प्रारंभ कर दी है। शिकायत वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी जितेंद्र मंडलोई द्वारा दर्ज कराई गई, जिसमें कृषि सहकारी समिति मर्यादित गहाल में 14 जून से 2 जुलाई 2026 के बीच कथित अनियमितताओं का उल्लेख किया गया है।
शिकायत के अनुसार कुछ किसानों पर अन्य भू-स्वामियों की सहमति के बिना शपथ-पत्र प्रस्तुत कर पंजीयन कराने के आरोप हैं। वहीं समिति के प्रभारी सहायक प्रबंधक एवं पोर्टल ऑपरेटर पर शासन के दिशा-निर्देशों के विपरीत समिति की लॉगिन आईडी का उपयोग कर पंजीयन प्रक्रिया पूरी कराने के आरोप लगाए गए हैं।
निजी ऑनलाइन सेंटर की भूमिका पर सवाल
इसी बीच छीपाबड़ क्षेत्र के श्रेया ऑनलाइन को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। स्थानीय स्तर पर यह आरोप लगाए जा रहे हैं कि कुछ किसानों के मूंग पंजीयन इसी निजी ऑनलाइन सेंटर से किए गए थे और इसके लिए कथित रूप से किसी सहकारी समिति की शासकीय लॉगिन आईडी का उपयोग किया गया।
यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं तो कई गंभीर सवाल खड़े होते हैं—
शासकीय समिति की गोपनीय लॉगिन आईडी निजी हाथों तक कैसे पहुंची?
आईडी किसके द्वारा उपलब्ध कराई गई?
कितने किसानों के पंजीयन इस माध्यम से किए गए?
क्या संबंधित अधिकारियों को इसकी जानकारी थी?
यदि अनियमितता हुई तो जिम्मेदारी किसकी तय होगी?
इन सवालों के जवाब अभी जांच के बाद ही सामने आएंगे।
मक्तापुर के किसानों ने भी लगाए गंभीर आरोप
कुछ दिन पूर्व ग्राम मक्तापुर के किसानों ने छीपाबड़ थाने में लिखित शिकायत देकर आरोप लगाया था कि उनकी जानकारी के बिना उनकी कृषि भूमि दूसरे किसानों के मूंग पंजीयन में जोड़ दी गई। किसानों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की थी।
किसानों का कहना है कि यदि ऐसी गड़बड़ियों पर समय रहते रोक नहीं लगी तो वास्तविक किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है और शासन की उपार्जन व्यवस्था पर लोगों का विश्वास कमजोर होगा।
नोडल विभाग की जिम्मेदारी भी चर्चा में
मूंग खरीदी और ई-पंजीयन का नोडल विभाग कृषि विभाग है। वहीं सहकारी समितियों के संचालन और लॉगिन व्यवस्था की जवाबदेही संबंधित समिति तथा जिला सहकारी बैंक से जुड़े अधिकारियों पर भी मानी जाती है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि यदि किसी शासकीय आईडी का कथित दुरुपयोग हुआ तो उसकी जवाबदेही किस स्तर पर तय की जाएगी।
किसानों की मांग
क्षेत्र के किसानों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि—
समिति की लॉगिन आईडी के उपयोग का पूरा डिजिटल रिकॉर्ड सार्वजनिक किया जाए।
जिन-जिन स्थानों से पंजीयन हुए उनकी तकनीकी जांच कराई जाए।
यदि किसी निजी ऑनलाइन सेंटर द्वारा शासकीय आईडी का उपयोग किया गया है तो उसकी निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए।
भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए लॉगिन सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाया जाए।
बड़ा सवाल
यदि पुलिस गहाल समिति से जुड़े कथित फर्जी पंजीयन की जांच कर रही है, तो शासकीय लॉगिन आईडी के कथित उपयोग को लेकर सामने आए निजी ऑनलाइन सेंटर की भूमिका की जांच आखिर कब शुरू होगी?
