हरदा खिरकिया। जिले के हरदा अंतर्गत आने वाली खिरकिया जनपद पंचायत की ग्राम कुड़ावा में पंचायत दर्पण एप पर धुंधले और अपठनीय बिल अपलोड किए जाने का मामला सामने आया है। इस घटनाक्रम ने पंचायत की कार्यप्रणाली, वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत द्वारा विकास कार्यों से संबंधित दस्तावेज जानबूझकर अस्पष्ट रूप में अपलोड किए गए हैं, जिससे वास्तविक खर्च और भुगतान की जानकारी साफ तौर पर सामने नहीं आ पा रही।
क्या है पूरा मामला
जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायत कुड़ावा द्वारा हाल ही में किए गए विभिन्न विकास कार्यों—निर्माण कार्य, सामग्री खरीदी और अन्य मदों में हुए खर्च—से संबंधित बिल और भुगतान विवरण पंचायत दर्पण एप पर अपलोड किए गए। यह एप पंचायत स्तर पर पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बनाया गया है, ताकि आम नागरिक भी ऑनलाइन पंचायत के आय-व्यय का विवरण देख सकें।
लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि एप पर अपलोड किए गए कई बिल इतने धुंधले हैं कि उनमें दर्ज राशि, तारीख, बिल नंबर और सामग्री का विवरण पढ़ पाना लगभग असंभव है। कुछ दस्तावेजों में हस्ताक्षर और मोहर तक स्पष्ट दिखाई नहीं दे रही है । ऐसे में यह संदेह गहराता जा रहा है कि कहीं न कहीं वित्तीय अनियमितताओं को छिपाने का प्रयास तो नहीं किया जा रहा।
ग्रामीणों में आक्रोश
ग्राम कुड़ावा के कई ग्रामीणों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि पंचायत में हुए कार्यों की गुणवत्ता और खर्च को लेकर पहले से ही चर्चा चल रही थी। जब लोगों ने पंचायत दर्पण एप पर दस्तावेज देखने की कोशिश की तो उन्हें धुंधले और अस्पष्ट बिल मिले। इससे ग्रामीणों में असंतोष और बढ़ गया।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि पंचायत द्वारा सभी कार्य नियमानुसार और पारदर्शी तरीके से किए गए हैं, तो स्पष्ट और उच्च गुणवत्ता वाले दस्तावेज अपलोड करने में कोई कठिनाई नहीं होनी चाहिए। उनका आरोप है कि धुंधले बिल अपलोड करना नियमों की अनदेखी और पारदर्शिता के सिद्धांत के विपरीत है।
पारदर्शिता के उद्देश्य पर असर
पंचायत दर्पण एप का मुख्य उद्देश्य पंचायत स्तर पर होने वाले विकास कार्यों और खर्च की जानकारी आमजन तक पहुंचाना है। सरकार द्वारा डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की पहल की गई थी। लेकिन जब दस्तावेज ही स्पष्ट न हों, तो इस पहल की उपयोगिता पर प्रश्नचिह्न लगना स्वाभाविक है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपलोड किए गए दस्तावेज पठनीय नहीं हैं, तो यह सूचना के अधिकार और सार्वजनिक निगरानी की भावना को कमजोर करता है। इससे न केवल शासन व्यवस्था पर भरोसा कम होता है, बल्कि भविष्य में होने वाले कार्यों की विश्वसनीयता भी प्रभावित होती है।
जिम्मेदार कौन?
मामले में पंचायत सचिव, संबंधित ऑपरेटर और अन्य जिम्मेदार कर्मचारियों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। दस्तावेज अपलोड करने की जिम्मेदारी पंचायत स्तर पर तय होती है। ऐसे में यदि अपलोड किए गए बिल स्पष्ट नहीं हैं, तो यह या तो लापरवाही का मामला हो सकता है या फिर जानबूझकर की गई कार्रवाई।
ग्रामीणों ने मांग की है कि जनपद पंचायत स्तर पर इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही एप पर अपलोड किए गए सभी धुंधले बिलों को हटाकर दोबारा स्पष्ट और सत्यापित दस्तावेज अपलोड किए जाएं।
जांच और कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई तो वे उच्च अधिकारियों और जिला प्रशासन से शिकायत करेंगे। उनका कहना है कि पंचायत निधि जनता के टैक्स और सरकारी योजनाओं से आती है, इसलिए हर खर्च का स्पष्ट विवरण सार्वजनिक होना चाहिए।
अब निगाहें प्रशासनिक अधिकारियों पर टिकी हैं कि वे इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं। यदि जांच में अनियमितता या लापरवाही साबित होती है तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई संभव है। ग्राम कुड़ावा का यह मामला एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि क्या डिजिटल पारदर्शिता केवल औपचारिकता बनकर रह गई है, या वास्तव में इसे प्रभावी बनाने के लिए सख्त निगरानी और जवाबदेही सुनिश्चित की जाएगी। इस संबंध मे ग्राम पंचायत कूड़ावा सचिव रामचंद्र तोमर को फोन किया गया लेकिन उनके द्वारा कॉल रिसीव नहीं किया गया।
इनका कहना
आपके द्वारा मामला संज्ञान मे आया है वेसे तो ग्राम पंचायत की जिम्मेदारो को साफ करके बिलों को अपलोड करना चाहिए जिससे आम नागरिक भी देख सके, जांच कर कार्रवाई की जायगी।
संजय इवने, मुख्य कार्यपालन अधिकारी खिरकिया
