हरदा। मध्यप्रदेश के हरदा जिला की खिरकिया तहसील से महज 7 किलोमीटर दूर स्थित पावन धाम चारुवा गुप्तेश्वर में महाशिवरात्रि के अवसर पर आस्था का महाकुंभ उमड़ पड़ा। बाबा महाकाल के दर्शन और जलाभिषेक के लिए लाखों श्रद्धालु सुबह से ही लंबी कतारों में खड़े नजर आए। पूरा क्षेत्र ‘हर-हर महादेव’ और ‘बम-बम भोले’ के जयघोष से गूंज उठा। महाशिवरात्रि पर्व के चलते चारुवा गुप्तेश्वर मंदिर को विशेष रूप से सजाया गया था। मंदिर परिसर को आकर्षक विद्युत सज्जा और फूलों से अलंकृत किया गया। तड़के 4 बजे से ही अभिषेक और पूजा-अर्चना का क्रम शुरू हो गया, जो देर रात तक जारी रहा। दूर-दराज के गांवों और शहरों से आए श्रद्धालुओं ने भगवान शिव का जलाभिषेक कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।
पुलिस प्रशासन रहा मुस्तैद
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस और प्रशासन ने चाक-चौबंद व्यवस्था की थी। सुरक्षा के मद्देनजर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया, वहीं यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए विशेष रूट डायवर्जन लागू किया गया। महिला एवं पुरुष श्रद्धालुओं के लिए अलग-अलग कतारें बनाई गईं। चिकित्सा शिविर और पेयजल की भी समुचित व्यवस्था की गई थी। एसडीएम शिवांगी बघेल तहसीलदार लवीना घागरे एसडीओपी रॉबर्ट गिरवाल और थाना प्रभारी संतोष चौहान सहित प्रशासनिक अधिकारियों ने लगातार व्यवस्थाओं का जायजा लिया। ड्रोन कैमरों के माध्यम से भीड़ पर नजर रखी गई, ताकि किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो। स्वयंसेवी संस्थाओं ने भी प्रसाद वितरण और मार्गदर्शन में सहयोग दिया।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिला बढ़ावा
महाशिवरात्रि मेले के चलते स्थानीय व्यापारियों और दुकानदारों के चेहरे खिले नजर आए। फूल-माला, प्रसाद, खिलौने और खान-पान की दुकानों पर दिनभर रौनक रही। श्रद्धालुओं की भीड़ से क्षेत्र में मेले जैसा माहौल बना रहा। चारुवा गुप्तेश्वर धाम में हर वर्ष महाशिवरात्रि पर भव्य आयोजन होता है, लेकिन इस वर्ष श्रद्धालुओं की संख्या मे पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए। देर रात तक दर्शन का सिलसिला जारी रहा और पूरा क्षेत्र शिवमय वातावरण में डूबा रहा।
250 वर्ष से अधिक पुराना मंदिर
सर्वराकार शिव प्रसाद शास्त्री ने बताया कि यह प्राचीन स्वयं भू मंदिर हे मंदिर लगभग 250 वर्ष से भी अधिक पुराना हे यह मंदिर खुदाई में निकला था पहले इस नगरी का नाम चमपा नगरी था। यह मंदिर महाभारत कालीन प्रतीत होता हे शिखर पर पथ्थरों को काट कर मूर्तिया बनाई गई मंदिर के पीछे एक गुफा हे चारुवा क़िले से इस गुफा का रास्ता हे। यहाँ रहने वाले एक सोनी परिवार को स्वपन में टीले में मंदिर होने की बात आने पर खुदाई में यह मंदिर निकला। शिवरात्रि पर अल सुबह ध्वजा चड़ाई गई गर्भ ग्रह को फूलो से सजाया गया और शिवलिंग का आकृषक शृंगार किया गया। इस मंदिर का संचालन एक समिति द्वारा किया जाता हे शिवरात्रि पर्व को लेकर स्मिती द्वारा दृशनार्थियों के लिय एलईडी के माध्यम से मंदिर के बाहर भी ग्रभ ग्रह के दर्शन की व्यवस्था की गई।
आस्था, व्यवस्था और उत्साह का अद्भुत संगम
महाशिवरात्रि के इस पावन अवसर पर चारुवा गुप्तेश्वर में उमड़ी श्रद्धा ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि भगवान शिव के प्रति लोगों की आस्था अटूट है। प्रशासन और पुलिस की सतर्कता के चलते आयोजन शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न हुआ।
