खिरकिया। कृषि उपज मंडी खिरकिया में कथित मूंग चोरी का मामला अब गंभीर और संवेदनशील रूप लेता जा रहा है। मंडी परिसर के भीतर व्यापारियों और किसानों की उपज कितनी सुरक्षित है, इस घटना ने उस व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं, जो किसानों और व्यापारियों के माल की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालती है। मामले में सामने आए आरोपों ने न केवल मंडी प्रशासन की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगाया है, बल्कि कर्मचारियों की भूमिका को लेकर भी संदेह पैदा कर दिया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार व्यापारी रितेश राठौर की कांटा तौल हो चुकी मूंग की उपज में से चारुवा-मोरगढ़ी क्षेत्र के एक फड़िए द्वारा लगभग दो क्विंटल मूंग चोरी किए जाने का मामला सामने आया। व्यापारी को संदेह होने पर मंडी परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले गए, जिसमें कथित तौर पर चोरी की घटना कैद होना बताया जा रहा है। घटना सामने आने के बाद मंडी प्रशासन सक्रिय तो हुआ, लेकिन कार्रवाई को लेकर कई सवाल भी उठने लगे।
पंचनामा बनाने के बाद मामला दबाने की चर्चा
सूत्रों के अनुसार प्रांगण प्रभारी राकेश लखोरे मौके पर पहुंचे और प्रारंभिक कार्रवाई के तहत पंचनामा तैयार किया गया, लेकिन बाद में चर्चा यह रही, मंडी परिसर में यह चर्चा जोरों पर है कि यदि घटना स्पष्ट रूप से सामने आई थी, तो फिर कार्रवाई आगे क्यों नहीं बढ़ी।
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यदि चोरी की पुष्टि सीसीटीवी फुटेज से हुई थी तो संबंधित वाहन को मंडी परिसर से बाहर जाने की अनुमति कैसे दी गई? साथ ही तत्काल पुलिस में शिकायत या एफआईआर दर्ज क्यों नहीं कराई गई?
चोरी पकड़ी गई, फिर आरोपी कैसे निकला बाहर?
मामले में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यदि घटना सीसीटीवी में कैद थी, तो संबंधित वाहन को मंडी परिसर से बाहर कैसे जाने दिया गया। मंडी परिसर में यह चर्चा भी जोरों पर है कि प्रांगण प्रभारी राकेश लखोरे ने पंचनामा बनाया।
दो मंडियों का प्रभार, व्यवस्था पर उठ रहे सवाल
मामले के पीछे प्रशासनिक ढांचे की कमजोर व्यवस्था भी कारण मानी जा रही है। जानकारी के अनुसार मंडी सचिव अशोक ठाकुर के पास खिरकिया और सिराली दोनों मंडियों का प्रभार है। ऐसे में एक अधिकारी द्वारा दो मंडियों की जिम्मेदारी संभालने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि दोहरी जिम्मेदारी के कारण निगरानी व्यवस्था कमजोर हुई है, जिसका फायदा कुछ कर्मचारी उठा रहे हैं। आरोप यह भी लगाए जा रहे हैं कि कर्मचारी कार्यवाहक व्यवस्था का लाभ लेकर अपनी मनमर्जी से काम कर रहे हैं और जवाबदेही कमजोर होती जा रही है।
आरोपी का नाम सामने नहीं आने से बढ़ी शंका
व्यापारियों और किसानों के बीच यह भी चर्चा है कि यदि घटना सामने आ चुकी है तो संबंधित आरोपी का नाम सार्वजनिक क्यों नहीं किया जा रहा। इससे मंडी प्रशासन की निष्पक्षता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। कई लोगों का मानना है कि मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है।
किसान और व्यापारी संगठनों में नाराजगी
मामले को लेकर किसान और व्यापारी संगठनों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। किसान संघ अध्यक्ष रूप सिंह राजपूत ने कहा कि मंडी परिसर के भीतर हुई इस घटना और उसके बाद अधिकारियों के संदेहास्पद रवैये ने किसानों और व्यापारियों में असंतोष पैदा किया है।
उन्होंने कहा कि यदि रंगेहाथ पकड़े जाने के बाद भी आरोपियों पर कार्रवाई नहीं होगी तो भविष्य में किसानों और व्यापारियों की उपज सुरक्षित रखना मुश्किल हो जाएगा। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
जांच पर उठ रहे सवाल, अब उच्च अधिकारियों की कार्रवाई पर नजर
फिलहाल मंडी प्रशासन मामले की जांच किए जाने की बात कह रहा है, लेकिन प्रांगण प्रभारी की भूमिका चर्चाओं ने पूरे घटनाक्रम को और विवादित बना दिया है। अब सभी की निगाहें उच्च अधिकारियों पर टिकी हैं कि वे इस मामले में निष्पक्ष कार्रवाई करते हैं या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।
