हरदा । जिले की तहसील खिरकिया एक बार फिर पूरे जिले में चर्चा का केंद्र बन गई है। यहां ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ के अंतर्गत 44 एकड़ में फैले विशाल छीपाबड़ अटल तालाब के गहरीकरण का कार्य ऐतिहासिक स्तर पर शुरू हो गया है। सबसे चौंकाने वाली और प्रेरणादायक बात यह है कि इस पूरे अभियान में नगर परिषद का एक भी रुपया खर्च नहीं हो रहा, बल्कि जनता और प्रशासन मिलकर जनभागीदारी से इस कार्य को अंजाम दे रहे हैं।
तालाब गहरीकरण को लेकर क्षेत्र में उत्साह का माहौल है। अटल तालाब समिति और प्रशासन की मौजूदगी में तय किया गया कि तालाब से निकलने वाली मिट्टी किसानों को मात्र ₹100 प्रति ट्रॉली की दर से दी जाएगी। इससे किसानों को उपजाऊ मिट्टी मिल रही है और तालाब का गहरीकरण भी तेज गति से हो रहा है। यह मॉडल अब पूरे जिले के लिए मिसाल बनता नजर आ रहा है।
स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने बताया कि छीपाबड़ अटल तालाब सिर्फ एक जलाशय नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र की जीवनरेखा है। यह तालाब खिरकिया सहित आसपास 10 से 15 किलोमीटर तक के भूजल स्तर को संतुलित रखने में अहम भूमिका निभाता है। पिछले वर्षों में लगातार गिरते जलस्तर और बढ़ते जल संकट को देखते हुए इस बार मानसून आने से पहले तालाब को अधिक से अधिक गहरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
किसानों के लिए वरदान साबित होगी मिट्टी
तालाब से निकल रही उपजाऊ मिट्टी किसानों के खेतों तक पहुंच रही है। किसानों का कहना है कि इससे खेतों की उर्वरक क्षमता बढ़ेगी और फसल उत्पादन में भी सुधार होगा। यानी एक तरफ जल संरक्षण तो दूसरी ओर खेती को मजबूती — दोनों फायदे एक साथ मिल रहे हैं।
प्रशासन और जनता ने लिया जल संरक्षण का संकल्प
कार्यक्रम के दौरान मौजूद जनप्रतिनिधियों, नागरिकों और नगर परिषद कर्मचारियों ने जल संरक्षण एवं स्वच्छता की शपथ ली। इस अभियान में नगर परिषद अध्यक्ष इंद्रजीत महेंद्र सिंह खनूजा, उपाध्यक्ष विजयंत गौर, सीएमओ महेंद्र सिंह खनूजा, पार्षदगण, तालाब समिति के सदस्य एवं बड़ी संख्या में नागरिक सक्रिय रूप से जुटे हुए हैं।
पूरे जिले में बन रहा चर्चा का विषय
बिना सरकारी बजट के इतना बड़ा जल संरक्षण अभियान अब जिलेभर में चर्चा का विषय बन चुका है। लोगों का कहना है कि यदि इसी तरह समाज और प्रशासन मिलकर काम करें तो जल संकट जैसी बड़ी समस्याओं का समाधान आसानी से किया जा सकता है।
“जल है तो कल है” का संदेश दे रहा खिरकिया
जहां कई योजनाएं बजट के अभाव में अधूरी रह जाती हैं, वहीं खिरकिया का यह प्रयास यह साबित कर रहा है कि मजबूत इच्छाशक्ति और जनसहयोग से बड़े बदलाव संभव हैं। छीपाबड़ अटल तालाब का गहरीकरण अब सिर्फ एक निर्माण कार्य नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए जल बचाने का जनआंदोलन बन चुका है।
